एलोवेरा की खेती से किसानों को हो सकता है कई गुना मुनाफा - जानिए उन्नत किस्में और खेती का सही तरीका.

आयुर्वेदिक और इम्युनिटी बढ़ाने वाले प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग ने किसानों को एलोवेरा की खेती में रुचि लेने पर मजबूर किया है।

एलोवेरा की खेती से किसानों को हो सकता है कई गुना मुनाफा - जानिए उन्नत किस्में और खेती का सही तरीका.
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एलोवेरा की खेती से किसानों को हो सकता है कई गुना मुनाफा - जानिए उन्नत किस्में और खेती का सही तरीका.

आज के समय में आयुर्वेदिक और इम्युनिटी बढ़ाने वाले प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग ने किसानों को एलोवेरा की खेती में रुचि लेने पर मजबूर किया है। इस लेख में हम जानेंगे कि एलोवेरा की उन्नत किस्में, खेती के लिए सही मिट्टी, जलवायु, बुआई, और कटाई का सही समय क्या है।

एलोवेरा की उन्नत किस्में:

एलोवेरा की खेती के लिए कई प्रजातियां हैं जिनमें से एलो बार्बेडेंसिस, ए.चिनेंसिस, ए. परफोलियाटा, ए. वल्गारिस, ए इंडिका, ए.लिटोरेलिस, और ए.एबिसिनिका प्रमुख हैं। सीमैप, लखनऊ ने भी एलोवेरा की उन्नत प्रजाति (अंकचा/एएल-1) विकसित की है, जो व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त है।

खेती के लिए मिट्टी का चयन:

एलोवेरा की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके लिए पहाड़ी और बलूई दोमट मिट्टी सही होती है। भूमि को अच्छी तरह से तैयार करना बहुत जरूरी है और भूमि का पीएच मान 8.5 तक होना चाहिए।

पौधे लगाने का सही समय:

एलोवेरा के पौधे जुलाई-अगस्त में लगाए जा सकते हैं, जो एक अच्छी पैदावार की सुनिश्चितता करता है। रोपाई के दौरान पौधों के बीच 40-45 सेमी की दूरी रखना चाहिए ताकि तुड़ाई करना आसान हो।

सिंचाई का महत्व:

बरसात और ठंड के मौसम में एलोवेरा के खेती में ज़्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन गर्मी के मौसम में पंद्रह दिन में एक बार सिंचाई करना उचित होता है।

कटाई और पैदावार:

एलोवेरा के पौधे 8-10 महीने के बाद कटाई के लिए तैयार होते हैं, और एक एकड़ के खेत में तक़रीबन 11,000 से अधिक पौधे लगा सकते हैं, जिससे प्रति एकड़ से 20-25 टन की पैदावार हो सकती है।

एलोवेरा की खेती का मौसम:

एलोवेरा की खेती सर्दियों के महीनों को छोड़कर पूरे साल की जा सकती है, लेकिन गर्मी के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है।

एलोवेरा की उपयोगिता:

एलोवेरा का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं से लेकर सौंदर्य उत्पादों तक में होता है। इसके चिकित्सीय गुणों और विभिन्न उपयोगों के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए किसान एलोवेरा की उन्नत प्रजातियों के लिए स्थानीय अनुसंधान संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं और उनसे सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

इस रूपरेखा का पालन करके किसान एलोवेरा की खेती से आसानी से कमा सकते हैं और इसमें सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यावसायिक दृष्टि से भी एक उत्कृष्ट विकल्प है जो स्वास्थ्य सेहत के उत्पादों की मांग में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को आर्थिक सहारा भी प्रदान कर सकता है।

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