कागजी नींबू की उन्नत खेती: बढ़ते उत्पादन के लिए कब और कैसे करे बागवानी .

विटामिन 'सी', 'ए', 'बी-1', लौह, फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, रेशा, वसा, खनिज, और शर्करा मौजूद होती हैं। यह फल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है और इसकी मांग भारत भर में बनी रहती है।

कागजी नींबू की उन्नत खेती: बढ़ते उत्पादन के लिए कब और कैसे करे बागवानी .
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कागजी नींबू की उन्नत खेती: बढ़ते उत्पादन के लिए कब और कैसे करे बागवानी .

कागजी नींबू, जिसे आमतौर पर कागजी नींबू कहा जाता है, भारत में एक महत्वपूर्ण फल माना जाता है। इसमें विभिन्न प्रजातियां होती हैं और इसके फलों में विटामिन 'सी', 'ए', 'बी-1', लौह, फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, रेशा, वसा, खनिज, और शर्करा मौजूद होती हैं। यह फल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है और इसकी मांग भारत भर में बनी रहती है।

खेती की तकनीक:

भूमि और जलवायु:

प्रवृत्ति और जलवायु सामरिक बनाएं: कागजी नींबू का पौधा सहिष्णु प्रवृत्ति का होता है, और उच्च उपोष्ण तथा उष्ण जलवायु सर्वोत्तम मानी जाती है।

मृदा चयन: अच्छा उत्पादन के लिए बलुई तथा बलुई दोमट मृदा उत्तम है, जिसमें जीवांश पदार्थ प्रचुर मात्रा में हों।

पानी प्रबंधन: सुनिश्चित करें कि मृदा में पर्याप्त नमी है और सिंचाई का उचित प्रबंधन करें।

उन्नत प्रजातियां:

प्रमुख प्रजातियां: एन.आर.सी.सी. नींबू -7, एन.आर.सी.सी नींबू-8, पूसा अभिनव, पूसा उदित, विक्रम, कागजी कला, चक्रधर, और साई सर्बती इत्यादि।

खरीददारी: विश्वसनीय स्रोत से स्वस्थ और रोगमुक्त पौधे खरीदें।

पौध प्रसारण:

विधि: बीज, कलिकायन, और एयर लेयरिंग गूटी विधि से प्रसारण करें।

गूटी विधि: गूटी तैयार करने के लिए पेन्सिल की मोटाई की शाखा का चयन करें और उचित धारा में सिंचाई करें।

सिंचाई और खाद:

सिंचाई:

नियमित सिंचाई: वर्षा के अभाव में नियमित सिंचाई करें।

सिंचाई पद्धति: सिंचाई के समय हमेशा ध्यान रखें कि पानी पौधे के मुख्य तने से न लगे।

खाद और उर्वरक:

उचित मात्रा में खाद दें: मृदा की उर्वरा क्षमता और पौधे की आयु के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का निवारण: सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लिए सुपरफॉस्फेट, सल्फेट ऑफ पॉटैशियम, बोरॉन, इत्यादि का सुधार करें।

रोग और कीट प्रबंधन:

सुरक्षित कीटनाशकों का उपयोग: नीम तेल, नीम केक, और बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों का उपयोग करें।

रोग प्रतिरोधक पौधों का चयन: सुरक्षित और प्रतिरोधी प्रजातियों का चयन करें।

संचार एवं परिचर्चा:

नियमित संचार: पौधों की स्वस्थता की निगरानी रखने के लिए नियमित संचार करें।

प्रभावी परिचर्चा: अपने क्षेत्र में प्रभावी परिचर्चा और उन्नत खेती प्रविधियों का उपयोग करें।

इन उपायों का अनुसरण करके कागजी नींबू की उन्नत खेती कर सकते हैं और अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

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