गेहूं की खेती: बुआई, सिंचाई, देखभाल और अधिक पैदावार कैसे प्राप्त करें.

भारत में एक महत्वपूर्ण रबी फसल है जिसका उत्पादन बढ़ाने के लिए सही तकनीकों का प्रयोग करना आवश्यक है।

गेहूं की खेती: बुआई, सिंचाई, देखभाल और अधिक पैदावार कैसे प्राप्त करें.
X

गेहूं की खेती: बुआई, सिंचाई, देखभाल और अधिक पैदावार कैसे प्राप्त करें.

गेहूं (Wheat) की खेती भारत में एक महत्वपूर्ण रबी फसल है जिसका उत्पादन बढ़ाने के लिए सही तकनीकों का प्रयोग करना आवश्यक है। इस लेख में, हम गेहूं की बुआई, सिंचाई, देखभाल, और अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे।

गेहूं की बुआई:

गेहूं की बुआई एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो उच्च उत्पादन के लिए सही समय पर की जानी चाहिए। बुआई का समय लगभग 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होता है। बुआई को समय पर और पर्याप्त नमी के साथ करना चाहिए। देर से पकने वाली प्रजातियों की बुआई से उत्पादन में कमी हो सकती है।

गेहूं की बुआई का समय अच्छी तरह से निर्धारित करना चाहिए ताकि उत्पादन में कोई कमी ना हो। बीज सीडड्रिल से बोने जाने पर उर्वरक और बीज की बचत हो सकती है।

गेहूं की बुवाई:

गेहूं की बुवाई को सही समय पर करना एक महत्वपूर्ण कदम है। बुवाई का समय खरीफ की फसलों के बाद होता है, लेकिन इसे सही समय पर करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। धान की पूर्व-प्रजातियों का चयन समय से करना चाहिए ताकि रबी की फसलों की बुआई समय पर हो सके।

गेहूं की बुवाई के लिए खेत की अच्छी तैयारी करनी चाहिए और खेत की नमी को भी चेक करना चाहिए। रोटावेटर से जुताई करने से खेत तैयार हो जाता है और गेहूं की बुवाई को समय से करना चाहिए।

गेहूं का बीज:

गेहूं के बीज की मात्रा और उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करना आवश्यक है। मशीन से बुवाई करने पर, 100 किलोग्राम साधारित दाना और 125 किलोग्राम मोटा दाना प्रति हेक्टेयर के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए। बीज की अंकुरण क्षमता को निश्चित करने के लिए पहले से बीज की जांच करनी चाहिए।

गेहूं में सिंचाई:

गेहूं की सिंचाई भी सही समय पर और सही मात्रा में करनी चाहिए। सिंचाई का समय सर्दियों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करता है। अगर बारिश कम होती है, तो गेहूं में 4 से 6 सिंचाई अति आवश्यक है। अच्छी खेती के लिए, सिंचाई का समय सही चयन करना चाहिए और नमी की मात्रा को भी ध्यान में रखना चाहिए।

गेहूं की पैदावार:

गेहूं की पैदावार को बढ़ाने के लिए खाद, उर्वरक, और पोषण का सही समय पर प्रदान करना आवश्यक है। खेतों की देखभाल, प्राथमिकता देना, और समय से समय पर सिंचाई करना पैदावार में वृद्धि कर सकता है।

इस प्रकार, गेहूं की खेती में सही तकनीकों का प्रयोग करने और सही समय पर कार्रवाई करने से अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। गेहूं के सही उत्पादन के लिए, खाद्य, सिंचाई, और बुआई की प्रक्रिया में सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा:

पूर्व बुआई में, खेत में लगभग 1 कुंटल डीएपी प्रयोग करना चाहिए।

बुवाई के बाद पहले दो भराई में, खेत में लगभग 2 बार यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।

यूरिया की मात्रा प्रति हेक्टेयर लगभग 1 कुंटल होनी चाहिए।

सिंचाई के बाद, गेहूं में लगभग 15 दिनों में एक बार यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।

सिंचाई का सही समय:

पहला पानी लगभग अंकुरण के बाद 5-6 इंच के पौधे के साथ होना चाहिए।

अगली सिंचाई को 20-25 दिनों में करना चाहिए।

अगर भूमि रेतीली है, तो 15-20 दिनों के बाद सिंचाई करना चाहिए।

इस रूपरेखा में, हमने गेहूं की खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है और गेहूं की उत्तम पैदावार प्राप्त करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की है। इस लेख को अच्छी तकनीकी से भरा गया है ताकि किसानों को गेहूं की खेती में सफलता प्राप्त करने में मदद मिल सके।

Next Story
Share it