हरी खाद: सोयाबीन से भूमि को सुपरचार्ज करें और खेतों में जीविका बढ़ाएं.

यह खेती में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाता है। इस लेख में, हम देखेंगे कि हरी खाद कैसे किसानों को लाभान्वित कर सकती है.

हरी खाद: सोयाबीन से भूमि को सुपरचार्ज करें और खेतों में जीविका बढ़ाएं.
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हरी खाद: सोयाबीन से भूमि को सुपरचार्ज करें और खेतों में जीविका बढ़ाएं.

हरी खाद एक उत्कृष्ट तकनीक है जो खेतों को सुपरचार्ज करने और उसमें जीविका बढ़ाने का एक अद्वितीय तरीका है। यह खेती में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाता है। इस लेख में, हम देखेंगे कि हरी खाद कैसे किसानों को लाभान्वित कर सकती है और सोयाबीन को कैसे इसमें उपयोग करा जा सकता है।

हरी खाद क्या है?

हरी खाद, जिसे ग्रीन मैन्युअर भी कहा जाता है, एक सहायक फसल है जिसका उद्देश्य मुख्यत: भूमि को पोषण प्रदान करना है। इसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति होती है जो मिट्टी को सुरक्षित रूप से बनाए रखते हैं और उसे उपजनुमा बनाए रखते हैं। हरी खाद से भूमि में पोषण बढ़ता है और उसे उर्वरा बनाए रखता है।

हरी खाद के लाभ:

पोषण की बढ़ोतरी: हरी खाद से मिट्टी में पोषक तत्त्व बढ़ते हैं, जिससे उपजाऊता में सुधार होता है।

मृदा स्वास्थ्य: हरी खाद के प्रयोग से मृदा की भौतिक, रासायनिक और जैविक स्वस्थ्य में सुधार होता है।

प्रदूषण का नियंत्रण: यह वातावरण और भूमि प्रदूषण को कम करने में मदद करता है।

हरी खाद कैसे लगाएं:

सोयाबीन का उपयोग: सोयाबीन हरी खाद के रूप में उपयोग के लिए एक अच्छा विकल्प है। इसे हरी स्थिति में हल चलाकर मिट्टी में मिला देना चाहिए।

हरी खाद के लाभ:

पौषणिक तत्त्वों की बृद्धि: हरी खाद में पौषणिक तत्त्वों की अधिक मात्रा होती है जो उपजाऊता में सुधार करता है।

मृदा स्वास्थ्य: इससे मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और मृदा में सूक्ष्म तत्वों की आपूर्ति होती है।

रसायनिक उर्वरकों की कमी: हरी खाद का प्रयोग करके रसायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम किया जा सकता है।

हरी खाद के व्यावहारिक प्रयोग:

नमी की कमी वाले क्षेत्रों में: हरी खाद को विशेषकर उन क्षेत्रों में लगाएं जहां नमी कम होती है।

सूक्ष्म तत्वों की आपूर्ति के लिए: इससे सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है और मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

हरी खाद वाली फसलें:

दलहनी फसलें: सनैइ, ढैंचा, लोबिया, उड़द, मूंग, ग्वार आदि हरी खाद के रूप में लगाई जा सकती हैं।

आदर्श हरी खाद फसल के गुण:

न्यूनतम खर्च: हरी खाद से उगाने में कम खर्च होता है।

न्यूनतम सिंचाई: इससे सिंचाई की कमी होती है और पादप संरक्षण में मदद करता है।

हरी खाद एक प्रभावी और सस्ता तरीका है जिससे किसान अपनी खेतों को सुपरचार्ज करके उच्च उपजाऊता प्राप्त कर सकता है। सोयाबीन को हरी खाद में उपयोग करके वह अपनी फसलों को और भी पोषित कर सकता है और आर्थिक रूप से भी बेहतरीन हो सकता है। इससे न केवल उपजाऊता में वृद्धि होगी बल्कि मृदा की स्वास्थ्य भी सुधरेगी और प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।

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