औषधीय पौधों से लाखों की कमाई: सीतापुर के किसान बन रहे हैं ग्रीन टी के सरताज.

भारतीय किसान नए-नए रास्तों की खोज में हैं जो उन्हें औषधीय पौधों की खेती से लाखों की कमाई करने में मदद कर रहे हैं।

औषधीय पौधों से लाखों की कमाई: सीतापुर के किसान बन रहे हैं ग्रीन टी के सरताज.
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औषधीय पौधों से लाखों की कमाई: सीतापुर के किसान बन रहे हैं ग्रीन टी के सरताज.

आज के समय में, भारतीय किसान नए-नए रास्तों की खोज में हैं जो उन्हें औषधीय पौधों की खेती से लाखों की कमाई करने में मदद कर रहे हैं। सीतापुर जिले के किसान अशोक गुप्ता एक ऐसे सफल किसान हैं जो ग्रीन टी की खेती से लखपति बन रहे हैं और महाराष्ट्र तक सप्लाई कर रहे हैं। इस लेख में, हम उनकी कहानी को जानेंगे और कैमोमाइल की खेती के फायदे और उससे होने वाले लाभों की चर्चा करेंगे।

ग्रीन टी की खेती का सफलता से कामयाबी:

अशोक गुप्ता ने बताया कि उन्होंने ग्रीन टी की खेती से सालाना लाखों की कमाई करना शुरू की है। सात साल पहले, उन्होंने कैमोमाइल की खेती 6 एकड़ में शुरू की थी, जिससे हर साल 3-4 लाख रुपये की इनकम हो रही है। उनका कहना है कि कैमोमाइल ग्रीन टी एक हर्बल टी है जो काफी लोकप्रिय है और इसमें शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे सेहत के लाभकारी बनाता है।

औषधीय खेती का मॉडल:

अशोक गुप्ता ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती की जगह औषधीय खेती का मॉडल अपनाया है। उन्होंने देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से बनाए गए उर्वरा शक्ति को खेत में प्रयोग करके लागत को कम किया है और इससे उन्हें 75 फीसदी लागत कमी हो रही है।

अन्य औषधीय पौधों की खेती:

अशोक गुप्ता के अनुसार, उन्होंने वर्तमान में अपनी 4 एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट, अकरकरा, तुलसी, अश्वगंधा, हिबिस्कस जैसी और औषधीय पौधों की खेती करना शुरू किया है। इससे उन्हें वार्षिक रूप में 7-8 लाख रुपए की आय हो रही है। यह दिखाता है कि औषधीय पौधों की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं और इससे स्वस्थ जीवन के लिए भी लाभ हो सकता है।

स्वास्थ्य लाभ:

कैमोमाइल टी के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसका सेवन बंद नाक, सर्दी-खांसी, गले में खराश आदि से राहत प्रदान कर सकता है। इससे डायबिटीज को भी कंट्रोल किया जा सकता है।

अशोक गुप्ता की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि औषधीय पौधों की खेती से किसान न केवल अच्छी कमाई कर सकते हैं, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। उनका मॉडल दिखाता है कि प्राकृतिक खेती से लागत कम होती है और उत्पादन भी बढ़ता है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा होता है। इस प्रकार, भारतीय किसानों को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों का साथ देना चाहिए।

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