गेहूं में गुल्ली डंडा से छुटकारा: किसानों के लिए अचूक उपाय और नियंत्रण के उपाय.

गेहूं में गुल्ली डंडा किसान साथीयों के लिए यह आर्टिकल है। यहां हम बात करेंगे इसके नियंत्रण हेतु कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं।

गेहूं में गुल्ली डंडा से छुटकारा: किसानों के लिए अचूक उपाय और नियंत्रण के उपाय.
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गेहूं में गुल्ली डंडा से छुटकारा: किसानों के लिए अचूक उपाय और नियंत्रण के उपाय.

गेहूं में गुल्ली डंडा नामक खरपतवार की समस्या के समाधान के लिए किसान साथीयों के लिए यह आर्टिकल है। यहां हम बात करेंगे कि कैसे इस समस्या को पहचाना जा सकता है और इसके नियंत्रण हेतु कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं।

गुल्ली डंडा की पहचान:

गुल्ली डंडा को पहचानना काफी कठिन हो सकता है क्योंकि यह छोटी फसलों में आसानी से छिप जाता है। लेकिन इसे पहचानने के लिए कुछ मुख्य लक्षण होते हैं:

नमी की कमी: गुल्ली डंडा नमी को शोख लेता है, जिससे फसल को अधिक पानी की जरुरत होती है।

बुवाई के बाद का समय: यह समस्या बुवाई के 30-40 दिनों बाद प्रकट हो सकती है।

फसल के अंकुरण के साथ संबंध: गुल्ली डंडा फसल के अंकुरण के साथ ही उग आता है, जिससे बढ़वार पर भी असर करता है।

गुल्ली डंडा का नियंत्रण:

गुल्ली डंडा से निजात पाने के लिए कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

उपाय खुराक प्रति हेक्टेयर में इस्तेमाल

पाइरोक्सासल्फोन 187.5 ग्राम 400-500 लीटर पानी में

पेंडीमेथिलीन 750 ग्राम 400-500 लीटर पानी में

सल्फो सल्फयूरान 33 ग्राम प्रति हेक्टेयर

इन उपायों को सही मात्रा में पानी के साथ मिलाकर बुवाई के बाद इस्तेमाल करने से गुल्ली डंडा से छुटकारा पाया जा सकता है।

उतरी और पूर्वी भारत में उपाय:

उतरी और पूर्वी भारत में गेहूं की बुवाई का कार्य धान की कटाई के बाद किया जाता है। इसके लिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बुवाई के 1-2 दिन बाद ही पेंडीमेथिलीन को प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

गेहूं में गुल्ली डंडा से निजात पाने के लिए उपरोक्त उपायों का अनुसरण करें और समस्या को सही समय पर पहचानें ताकि गेहूं की बढ़वार में कोई बाधा ना हो। किसान साथीयों को सुरक्षित और उन्नत खेती के लिए यह उपाय सार्थक हो सकता है।

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