किसानों के लिए बड़ी खबर! खेती की ये तकनीक से हो जाएंगे मालामाल, जानिए कैसे?

किसानों के लिए बड़ी खबर! खेती की ये तकनीक से हो जाएंगे मालामाल, जानिए कैसे?
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किसानों के लिए अक्सर सुनने को मिलता है कि उनकी खेती ही देश का अहम हिस्सा है। लेकिन कई बार फसलें बर्बाद होने से वह खुद भूखा रह जाते हैं, जो कि बड़ी समस्या होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन किसान अपनी खेती की तकनीक में बदलाव करके इस समस्या से बच सकता है।

खेती की तकनीकों में बदलाव करने से उन्हें नुकसान से बचाव और अधिक मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। हम यहां एक तकनीक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें रिस्क कम होता है और मुनाफा ज्यादा होता है - इंटीग्रेटेड फार्मिंग। इस तकनीक में किसान अधिक मुनाफा कमा सकता है और कम रिस्क के साथ खेती कर सकता है।

क्या है इंटीग्रेटेड फार्मिंग?

इंटीग्रेटेड फार्मिंग एक कृषि मॉडल है जिसमें एक ही स्थान पर विभिन्न किस्म की फार्मिंग गतिविधियां होती हैं। यहां एक स्थान पर कई प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं, पोल्ट्री और मछली पाली भी की जाती है। इस आधुनिक तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे छोटी जमीन पर भी किसान अच्छा मुनाफा कमा सकता है, बिना किसी अतिरिक्त खर्चे या नुकसान के। इस तकनीक को 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग के हैं कई फायदे

कम जमीन वाले किसान इस नई तकनीक के माध्यम से अपनी कमाई को दोगुना कर सकते हैं। यह तकनीक किसानों को एक ही स्थान पर कम खर्च में कई प्रकार की फसलें उगाने की सुविधा प्रदान करती है। नुकसान की संभावना भी कम होती है। खेती के बचे हुए कचरे का उपयोग पशुओं के चाराने के लिए किया जा सकता है। इससे अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग जगह जाने की जरूरत नहीं होती।

एक ही खेत में अलग-अलग फसलें, मछली पालन, और पोल्ट्री कर सकते हैं। इस प्रकार से उत्पन्न हुआ कचरा खाद बनाने में भी सहायता मिल सकती है। इस तकनीक से फसलों की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ती है, और सब्जियों की फसल भी अच्छी होती है।

इससे किसानों को अपने निजी उपयोग के लिए अनाज और सब्जियां उगाने का भी अवसर मिलता है। इसके अलावा, कम जगह, कम खर्च, और कम संसाधनों में फसल उगाने से किसानों को बेचने पर अच्छी आय मिलती है।

आसान है इंटीग्रेटेड फार्मिंग शुरू करना

एकीकृत खेती को शुरू करना बहुत आसान है, यह एक टाइम इन्वेस्टमेंट का फॉर्मूला है, जिसमें फसल की प्रकृति, पशुओं की जाति, पोल्ट्री का स्थान, मछली की प्रकार के साथ-साथ तालाबों और तटबंधों के निर्माण और बाजार की मांग का भी ध्यान रखना होता है.

इससे किसानों के लिए एकीकृत फार्मिंग से उगाई जाने वाली पैदावार की बिक्री करना आसान हो जाता है, लेकिन एकीकृत फार्मिंग शुरू करने के लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना फायदेमंद साबित होता है. कृषि विशेषज्ञ किसान के बजट और जमीन के हिसाब से फार्मिंग में सही चीजें जोड़ने की सलाह देते हैं, जिससे किसानों को काफी मदद मिलती है.

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