बीटेक किसान अंशुल मिश्रा जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती नहीं, बल्कि नर्सरी से कमाए हैं 10 लाख रुपए, बेच चुके हैं 20,000 से भी अधिक पौधे

अंशुल मिश्रा ने बताया कि वह ड्रैगन फ्रूट की खेती में रुचि रखने वाले किसानों को ट्रेनिंग भी प्रदान करते हैं, और उन्हें इसमें सहायता करने के लिए कोई शुल्क नहीं लेते हैं।

बीटेक किसान अंशुल मिश्रा जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती नहीं, बल्कि नर्सरी से कमाए हैं 10 लाख रुपए, बेच चुके हैं 20,000 से भी अधिक पौधे
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बीटेक किसान अंशुल मिश्रा जिन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती नहीं, बल्कि नर्सरी से कमाए हैं 10 लाख रुपए, बेच चुके हैं 20,000 से भी अधिक पौधे

शाहजहांपुर के युवा किसान अंशुल मिश्रा ने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता के साथ मिलकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। इस श्रेणी के फलों के साथ-साथ, उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी भी तैयार करके कई प्रदेशों में सप्लाई कर रहे हैं, और इस काम से उन्होंने अब तक 10 लाख रुपए की कमाई कर ली है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती

अंशुल मिश्रा ने 2019 में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ड्रैगन फ्रूट की खेती में कदम रखा। उनका कहना है कि उनके 5 एकड़ के खेत में वे ड्रैगन फ्रूट के पौधे उगा रहे हैं, और इससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है। वह नर्सरी से लाए गए पौधों को छोटे-छोटे बैगों में मिट्टी के साथ लगाते हैं, जिन्हें कुछ ही दिनों में हरा होने में मदद मिलती है।

नर्सरी से कमाई

अंशुल मिश्रा ने बताया कि वह नर्सरी से बीते तीन सालों में करीब 20,000 से ज्यादा पौधे बेच चुके हैं, जिससे उन्हें एक अच्छी आय हुई है। इस बार उन्होंने लगभग 10 लाख रुपए की कमाई की है, जो नर्सरी से आई है।

सप्लाई का क्षेत्र

अंशुल मिश्रा का कहना है कि उनकी नर्सरी की सप्लाई विभिन्न राज्यों तक हो रही है, जैसे कि बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, और उत्तराखंड। ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से भी वे किसानों को नर्सरी भेज रहे हैं।

ट्रेनिंग और सहायता

अंशुल मिश्रा ने बताया कि वह ड्रैगन फ्रूट की खेती में रुचि रखने वाले किसानों को ट्रेनिंग भी प्रदान करते हैं, और उन्हें इसमें सहायता करने के लिए कोई शुल्क नहीं लेते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य है किसानों को सही जानकारी और समर्थन प्रदान करना ताकि वे भी इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें।


इसके अलावा, उनकी सप्लाई के क्षेत्र को बढ़ाने और और किसानों को सहायता करने के लिए वे ट्रेनिंग भी प्रदान कर रहे हैं, जो कि एक पॉजिटिव उदाहरण है। उनकी इस पहल से हमें किसानों के लिए नए और उन्नत तकनीकी तरीके दिख रहे हैं, जो उन्हें बेहतर और सुरक्षित कृषि करने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

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