Eucalyptus Farming: इस एक पेड़ की खेती किसान की होगी तगड़ी कमाई! कुछ ही महीनों में बन जाएंगे लखपति

Eucalyptus Farming: इस एक पेड़ की खेती किसान की होगी तगड़ी कमाई! कुछ ही महीनों में बन जाएंगे लखपति
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Eucalyptus Cultivation: किसानों की आय बढ़ाने के लिए यूकलिप्टस की खेती एक बड़ा फायदेमंद सौदा साबित हो रही है। यह खेती जल्दी से लाभ देने वाली होती है और कम समय में ही मुनाफा देने लगती है। यूकलिप्टस की खेती व्यापारिक इस्तेमाल के लिए ज्यादातर होती है, जहां इसके पेड़ों से पेटियां, ईंधन, फर्नीचर, और अन्य उत्पादों का निर्माण होता है।

इसके लिए विशेष जलवायु की जरूरत नहीं होती और इसे मौसम के परिवर्तनों से कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता। खेती के लिए खाद की जरूरत भी नहीं होती और न ही इसे किसी खतरनाक रोग का सामना करना पड़ता है। इससे यूकलिप्टस की खेती में न केवल लागत कम होती है, बल्कि इससे हजारों-लाखों का मुनाफा भी होता है।

यूकेलिप्टस की खेती कई राज्यों में की जाती है जैसे कि मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गोवा, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, और अन्य राज्य। यूकेलिप्टस पेड़ों की ऊँचाई लगभग 30 से 90 मीटर होती है।

यूकेलिप्टस के पेड़ों की खेती

यूकेलिप्टस की खेती के लिए, उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी का चयन करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसमें मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए और मिट्टी क्षारीय नहीं होनी चाहिए। यूकेलिप्टस पौधे कम पानी में भी अच्छी तरह से विकसित हो सकते हैं, इसलिए बारिश के मौसम में पानी देने की आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य मौसम में, प्रति 50 दिनों के अंतराल में पानी देना चाहिए।

लेकिन किसानों को यूकेलिप्टस के पौधों (Eucalyptus Plants) को खरपतवार से बचाना (Weed Protection) बेहद जरुरी होता है. इसके बचाव के लिए किसान को बरसात के मौसम में तीन से चार बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए.

भारत में बोई जाने वाली यूकेलिप्टस की टॉप 6 किस्में

यूकलिप्टस निटेंस

यूकलिप्टस ऑब्लिक्वा

यूकलिप्टस विमिनैलिस

यूकलिप्टस डेलीगेटेंसिस

यूकलिप्टस ग्लोब्युल्स

यूकलिप्टस डायवर्सीकलर

यूकेलिप्टस की बुवाई और रोपाई का समय

यूकेलिप्टस के पौधों से बेहतर उत्पादकता प्राप्त करने के लिए, किसानों को खेत में बुवाई से पहले गहरी जुताई करनी चाहिए और फिर खेत को समतल बनाना चाहिए। इसके बाद, खेत में गड्ढे बनाने चाहिए, और इससे पहले गड्ढों को सिंचित करना चाहिए ताकि खेत में नमी बनी रहे।

यूकेलिप्टस के पौधे नर्सरी से तैयार किए जाते हैं, और फिर उन्हें खेत में रोपा जाता है। रोपाई के लिए, बारिश का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं होती। एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी को 3 से 5 फीट रखना चाहिए ताकि वे सही तरीके से विकसित हो सकें।

यूकेलिप्टस की खेती में लागत और मुनाफा

देश के किसानों के लिए यूकेलिप्टस की खेती कम बजट वाली खेती (Low Budget Farming) है. हिसाब लगाया जाए तो किसान एक हेक्टेयर जमीन में 3000 तक यूकेलिप्टस के पौधे लगा सकते हैं. वहीं, नर्सरी (Plant Nursery) में यूकेलिप्टस के एक पौधे की कीमत लगभग 7 से 8 रुपए होती है.

इस तरह 3 हजार पौधे खरीदने के लिए आपको 20 से 25 हजार रुपये खर्च करने होंगे. यूकेलिप्टस का पेड़ 5 से 7 साल में पूरी तरह से विकसित हो जाता है. इसमें न तो खाद का खर्चा आता है और न ही किसी तरह के रोग के लिए किसान को खर्च करना पड़ता है.

ऐसे में देखा जए तो इसके हर एक पेड़ से करीब 400 से 500 किलो तक लकड़ी प्राप्त होती है. जिसकी बाजार में अच्छी कीमत होती है. कुल मिलाकर आप 4 से 5 सालों में 50-60 लाख रुपये तक की कमाई सरलता से कर सकते हैं.

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