किसान भाई कम पानी में करें सरसों की वैज्ञानिक खेती, बस रखें इन खास बातों का ख्याल, रेतीली मिट्टी में भी देगी दोगुना मुनाफा देगी सरसों की फसल

पौधों को पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई करें, फूलों के आने पर दूसरी सिंचाई करना बहुत फायदेमंद होता है।

किसान भाई कम पानी में करें सरसों की वैज्ञानिक खेती, बस रखें इन खास बातों का ख्याल, रेतीली मिट्टी में भी देगी दोगुना मुनाफा देगी सरसों की फसल
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किसान भाई कम पानी में करें सरसों की वैज्ञानिक खेती, बस रखें इन खास बातों का ख्याल, रेतीली मिट्टी में भी देगी दोगुना मुनाफा देगी सरसों की फसल

सरसों की खेती एक महत्वपूर्ण फसल है जो मध्यप्रदेश में विशेषकर रबी मौसम में अच्छी पैदावार देती है। इस लेख में, हम जानेंगे कैसे कम पानी में वैज्ञानिक तरीके से सरसों की खेती करके किसान भाइयों को अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।

भूमि एवं तैयारी

सरसों की पैदावार के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली बोनी और तैयार की गई भूमि का चयन करें।

भूमि को सममतल करने के लिए जुताई का सही तरीका अपनाएं।

बीज को सही गहराई और दूरी पर बोएं, जिससे पौधों को पर्याप्त स्थान मिले।

बुवाई का समय

सितम्बर के अंत या अक्टूबर के पहले हफ्ते में सरसों की बुवाई करें।

सही समय पर बुवाई करने से फसल का सही समय पर पूरा होता है और उत्पादन बढ़ता है।

बीज और उपचार

अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।

बीज को बोने से पूर्व बीज जनित रोगों से बचाव के लिए थीरम 2.5 ग्रा. /किग्रा. बीज की दर से या कार्बेन्डाजिम 2.5 गा्रम प्रति कि.गा्र बीज की दर से उपचारित करे जहां पर पाउडरी मिल्डयू या सफेद गेरूई रोग आने की संभावना हो तो मेटालेक्सिल 1.5 ग्राम/किग्रा. बीज में मिला कर उपचारित कर बुवाई करें।

भूमि उपचार:- फसल को भूमिगत कीटों से बचाव हेतु फोरेट 10 जी कि 20 किलो प्रति हे. या क्लोरोपायरीफास 20 कि.ग्रा या क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर मिट्टी में मिलायें।


जलवायु और सिंचाई

सरसों के लिए शुष्क और ठंडी जलवायु सुनिश्चित करें।

पौधों को पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई करें, फूलों के आने पर दूसरी सिंचाई करना बहुत फायदेमंद होता है।

उन्नतशील जातियां

किस्म और पकने की अवधि उपज (कि0ग्रा0/हे0)

1 आर.वी.एम-2 125-130 2000

2 आर.वी.एम-1 98-121 1400-2000

3 जे0एम0-1 125-130 1800-2100


निराई-गुडाई एवं बिरलीकरण:- बुवाई के 15-20 दिन बाद बिरलीकरण का कार्य किया जाना चाहिए। जिसमें घने पौधों को अलग करें तोरिया में पौध से पौध की दूरी 7-8 सेमी. सरसों में 10-15 सेमी. करना आवश्यक है जिससे पौधों की पैदावार अच्छी होती है।

रासायनिक विधि से खरपतवार नियंत्रण:- बुवाई के 20-25 दिन बाद निंदाई गुडाई करना आवयक है। साथ ही घने पौधों को निकालकर अलग करें। सरसों की फसल का प्याजी प्रमुख खरपतवार है। इसके नियंत्रण के लिए बासालीन 1 कि. ग्रा. सक्रिय तत्व/हे. बुवाई से पूर्व खेत में मिलावें अथवा आइसोप्रोटूरान 750 ग्रा. या पेन्डिमिथलीन की एक कि.ग्रा. मात्रा बोनी के तुरंत बाद एवं अंकुरण से पूर्व खेत में मिलावें


सिंचाई:- सरसों की पहली सिंचाई फूल आने से पूर्व 30-35 दिन पर दूसरी सिंचाई जब फली में दाना भरने लगे अवश्य करनी चाहिए इससे कृषकों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।



कटाई एवं गहाई:- सरसों की पŸिायां एवं फलियां पीली पड़ जाए तो फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। सूखने के उपरान्त सरसों के फसल की गहाई करनी चाहिए। जिससे बीज में नमी 10 प्रतिशत तक कम हो जाए और सरसों के बीज में कीड़े एवं फफूंद न लग सकें और वैज्ञानिक तरीके से बीज को भंडारित करें ।

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