किसान भाई ध्यान दे! आज ही शुरू करें कम लागत में इस फसल की खेती, होगा बंपर मुनाफा

किसान भाई ध्यान दे! आज ही शुरू करें कम लागत में इस फसल की खेती, होगा बंपर मुनाफा
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कन्नौज में किसानों की पारंपरिक और प्रमुख फसल आलू ही है। इस क्षेत्र में किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं, लेकिन हाल ही में यहां के किसानों को आलू की फसल में घाटा हो रहा है। इस परिस्थिति को देखते हुए कन्नौज के एक किसान ने बीते कई सालों से अपनी अनुभव से सीख लेकर आलू की जगह सब्जियों की ओर ध्यान देने का निर्णय लिया है।

उन्होंने गोभी और पत्ता गोभी की फसल और उनके बीजों के पैदावार में रुचि दिखाई है। इससे किसान को उसकी लागत का दोगुने से ज्यादा हर साल का फायदा हो रहा है। कन्नौज के नसरापुर गांव के किसान रामदयाल बीते कई सालों से आलू की पारंपरिक खेती की बजाय गोभी और पत्ता गोभी की फसल उगाते आ रहे हैं।

इससे उन्हें अपनी फसल की लागत से ज्यादा मुनाफा हो रहा है। इस साल शायद कुछ कमाई कम हुई हो, लेकिन फिर भी यह फसल उन्हें घाटा नहीं पहुंचाई है।

कैसे होती है बंद गोभी की खेती

रामदयाल बताते हैं कि यहाँ के किसान आलू और मक्का की खेती करते हैं, लेकिन उन्हें इसके साथ-साथ सब्जियों की खेती भी करनी चाहिए, क्योंकि यह सब्जियां उनकी आमदनी को बढ़ा सकती है। वे पहले टमाटर की खेती करते हैं, फिर गोभी और पत्ता गोभी की फसल उगाते हैं।

साथ ही, वे पौधों का भी काम करते हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा होता है। जब पौधे रोपे जाते हैं और नमी की आवश्यकता होती है, तो उन्हें पानी दिया जाता है। अगर नमी कम होती है, तो पौधे झुलस जाते हैं। ऐसे में, पत्ता गोभी के पौधों को पर्याप्त नमी में रखा जाता है। इस फसल को अधिक सिंचाई नहीं की जाती है, बल्कि इसे कम पानी में उचित रूप से तैयार किया जाता है। यह फसल लगभग 3 महीनों में तैयार हो जाती है।

बेहतर उत्पादन के साथ बेहतर मुनाफा कमा रहे

एक बीघा पत्ता गोभी और फूलगोभी की फसल करने में 10 हज़ार प्रति बीघा खर्च आ जाता है. वहीं जब इसके फायदे की बात की जाए तो इसकी लागत का डबल से ज्यादा फायदा मिल जाता है. प्रति बीघा करीब 25 से 30 हज़ार की फसल बिक जाती है.

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