बिजनौर के किसानों ने कमाल किया, 3 साल में 46 करोड़ रुपये की जैविक फसल बेचकर बढ़ाई आमदनी

ग्रीन सर्टिफिकेट से सम्मिलित होने के बाद, किसानों को और भी बाजार में आसानी से जैविक फसलें बेचने का अवसर मिला।

बिजनौर के किसानों ने कमाल किया, 3 साल में 46 करोड़ रुपये की जैविक फसल बेचकर बढ़ाई आमदनी
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बिजनौर के किसानों ने कमाल किया, 3 साल में 46 करोड़ रुपये की जैविक फसल बेचकर बढ़ाई आमदनी


बिजनौर के किसानों ने नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत तीन साल में 46 करोड़ रुपये की जैविक फसल बेची हैं। इस पहल में, जिले की 22 ग्राम पंचायतों के 46 ग्राम में जैविक खेती से जुड़ने का प्रयास किया गया।

जैविक खेती से उपाय





किसानों ने रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग की जगह जैविक खेती का चयन किया, जिससे न केवल गंगा के पानी को सुरक्षित रखा गया बल्कि उन्होंने भी बेहतर आमदनी की प्राप्ति की। ग्रीन सर्टिफिकेट से सम्मिलित होने के बाद, किसानों को और भी बाजार में आसानी से जैविक फसलें बेचने का अवसर मिला।

आमदनी में वृद्धि





पहले साल में किसानों ने 12 करोड़, दूसरे साल में 16 करोड़, और तीसरे साल में 18 करोड़ रुपये की फसल बेचीं। यह स्पष्ट है कि जैविक खेती ने किसानों की आमदनी में वृद्धि करने में सफलता प्राप्त की है।

योजना में शामिल गांव

नमामि गंगे जैविक खेती परियोजना के तहत कई गांवों ने इसमें भाग लिया है। इनमें गांव तैय्यबपुर गौरवा, सबलगढ़, बादशाहपुर, दयालवाला, जहानाबाद, खलीउल्लापुर, खेड़की हेमराज, मोहिउद्दीनपुर, रफीउलनगर उर्फ रावली, सैफपुर खादर, तैय्यबपुर काजी, टीप, दारानगर, निजामतपुरा, रसूलपुर पित्तनका, सलेमपुर मथना, बसंतपुर, दत्तियाना, सुजातपुर खादर शामिल हैं।

नेतृत्व और सहयोग

इस प्रयास में शील बायोटेक कंपनी ने किसानों को जैविक फसलों का बाजार प्रदान करने में मदद की है। किसानों के सहयोग से धीरे-धीरे जैविक खेती का अभ्यास होने लगा और उन्होंने गेहूं, धान, गन्ना, सरसों, सब्जियों आदि की जैविक खेती की।


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