पिता ने कभी बेटे को खेत नहीं जाने दिया, साइंटिस्ट बनने का था सपना, लेकिन दिवाकर ने खेती किसानी में गाड़ दिए झंडे, 1 एकड़ से कमाते हैं ₹6 लाख

परिवार के खिलाफ होने वाले विरोध के बावजूद, चैन्‍नपा ने एक नए सोच और तकनीक के साथ खजूर की खेती की शुरुआत की।

पिता ने कभी बेटे को खेत नहीं जाने दिया, साइंटिस्ट बनने का था सपना, लेकिन दिवाकर ने खेती किसानी में गाड़ दिए झंडे, 1 एकड़ से कमाते हैं ₹6 लाख
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पिता ने कभी बेटे को खेत नहीं जाने दिया, साइंटिस्ट बनने का था सपना, लेकिन दिवाकर ने खेती किसानी में गाड़ दिए झंडे, 1 एकड़ से कमाते हैं ₹6 लाख

इसरो के पूर्व साइंटिस्ट दिवाकर चैन्‍नपा ने अपने पिता की इच्‍छाओं के खिलाफ जाकर नौकरी छोड़ी और ऑर्गेनिक खजूर फार्मिंग में नए मीडियम को चुना।

बने सफल किसान

परिवार के खिलाफ होने वाले विरोध के बावजूद, चैन्‍नपा ने एक नए सोच और तकनीक के साथ खजूर की खेती की शुरुआत की। उनकी इस निर्णयक्रम में जापानी दार्शनिक मसानोबू फुकुओका की 'वन स्‍ट्रा रिवोल्‍यूशन' किताब ने भी अहम भूमिका निभाई।

ऑर्गेनिक खजूर फार्मिंग

चैन्‍नपा का ऑर्गेनिक खजूर फार्म 'मराली मन्निगे' के नाम से खुद को साबित कर रहा है। इस फार्म के प्रति एकड़ से 6 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है, जो एक साइंटिस्ट से किसान बनने की अनूठी सफलता की कहानी है। अगस्‍त, 2023 में चैन्‍नपा ने 4.2 टन यानी 4,200 किलोग्राम खजूर पैदा किए. फार्म पर वे 310 रुपये प्रतिकिलोग्राम के हिसाब से खजूर बेचते हैं, जबकि होम डिलीवरी 350 रुपये किलोग्राम के हिसाब से करते हैं. चैन्‍नपा प्रति एकड़ मुनाफा खजूर की खेती से ले रहे हैं.

नए उत्पाद

चैन्‍नपा ने अपनी खेती में जैविक तकनीक का प्रयोग करते हुए, पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचाने वाले तरीकों से खजूर उत्पन्न किए हैं। उनका यह प्रयास न केवल मुनाफा दिखा रहा है, बल्कि उनकी खेती एक नई दिशा में भी बढ़ रही है।

चुनौतियों का सामना

परिवार की आपसी बहस और खेती में नए क्षेत्र में काम करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, दिवाकर चैन्‍नपा ने अपनी इच्‍छा पर विजय प्राप्त की हैं। उनकी कहानी एक प्रेरणा स्रोत है, जो दिखाती है कि किसानी में भी समृद्धि की राह हो सकती है, चाहे आप जिस क्षेत्र से भी आएं।


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