क्या आपने भी देखी है मुल्तानी मिट्टी की खेती, 20 सालों से दे रही किसानों को रोजगार, राजस्थान की यह मिट्टी विदेशी बाजारों में बिकती है ₹5,000 प्रति किलो

ये खदानें सालाना 20 हजार टन मुल्तानी मिट्टी उत्पन्न करती हैं, जो देश और विदेश में बाजार में आती है।

क्या आपने भी देखी है मुल्तानी मिट्टी की खेती, 20 सालों से दे रही किसानों को रोजगार, राजस्थान की यह मिट्टी विदेशी बाजारों में बिकती है ₹5,000 प्रति किलो
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क्या आपने भी देखी है मुल्तानी मिट्टी की खेती, 20 सालों से दे रही किसानों को रोजगार, राजस्थान की यह मिट्टी विदेशी बाजारों में बिकती है ₹5,000 प्रति किलो

राजस्थान, भारत की मिट्टियों का राजा, जहां से निकलती है एक खास मिट्टी, जिसे हम मुल्तानी मिट्टी कहते हैं। बाड़मेर जिले के खदानों से प्राप्त होने वाली यह मिट्टी देश और विदेश में चेहरे की खूबसूरती के लिए लोकप्रिय है।

मुल्तानी मिट्टी का महत्व

प्राचीन शास्त्रों में उल्लेख

भारतीय शास्त्रों में मुल्तानी मिट्टी को सौंदर्य प्रसाधन के रूप में बयान किया गया है। राजघरानों की रानी-महारानियां इसे रूप निखारने के लिए इस्तेमाल करती थीं।

सौंदर्य उत्पादों में उपयोग

मुल्तानी मिट्टी से विभिन्न सौंदर्य उत्पाद बनते हैं, जैसे कि कॉस्मेटिक क्रीम और मेडिसिन। इससे बने साबुन भी बहुत ही पॉप्युलर हैं।

रोजगार का स्रोत

खादानों से निकली मिट्टी ने बाड़मेर के लोगों को बरसों से रोजगार प्रदान किया है।

खदानों का स्वरूप

जिला खदानें

बाड़मेर भाड़खा, कपूरडी, सोनड़ी, अभयपुरा, बोथिया, निम्बला, गिरल

ये खदानें सालाना 20 हजार टन मुल्तानी मिट्टी उत्पन्न करती हैं, जो देश और विदेश में बाजार में आती है।

मुल्तानी मिट्टी की बाजार में कीमतें

बाड़मेर में मिलने वाली मुल्तानी मिट्टी की कीमत खदान से निकालने के बाद महज 5 रुपये प्रति किलो है, जबकि बाजार में यह 10 रुपये से 50 रुपये प्रति किलो तक मिलती है। विदेशों में इसकी कीमत 5000 रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है।

मजदूरों की कहानी

मुल्तानी मिट्टी के खनन कारोबार से जुड़े मजदूरों की कहानी दुखद है। खनन के बाद भी, इन मजदूरों को मुनासिब कमाई नहीं होती, और वे गुजर-बसर लायक कमाई में जीवन यापन करते हैं।


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