किसानों के लिए जरूरी खबर! एरोमैटिक फसलों की खेती से बढ़ेगा मुनाफा, सरकार दे रही है ट्रेनिंग

किसानों के लिए जरूरी खबर! एरोमैटिक फसलों की खेती से बढ़ेगा मुनाफा, सरकार दे रही है ट्रेनिंग
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कई किसान नए दिशा में बदल रहे हैं और पारंपरिक फसलों की बजाय नई फसलों की खेती को ध्यान में रख रहे हैं। पारंपरिक फसलों में कम मुनाफा होने के कारण, वे कम लागत में उच्च मुनाफा देने वाली फसलों की खोज में हैं। सरकार भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रही है और किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

उन्हें एरोमा मिशन के अंतर्गत ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें बकायदा लेमन ग्रास, खस, मिंट, जिरेनियम, अश्वगंधा जैसी फसलों की जानकारी दी जाती है। इन फसलों से विभिन्न प्रोडक्ट्स तैयार किए जा सकते हैं, जो किसानों को बढ़े हुए मुनाफे की संभावनाएं प्रदान कर सकते हैं।

लेमनग्रास की खेती

लेमनग्रास के पौधों का व्यापक इस्तेमाल विभिन्न उत्पादों की निर्माण में किया जाता है, जैसे कि परफ्यूम, साबुन, नमकीन, डिटर्जेंट, तेल, हेयर ऑयल, मच्छर रिपेलेंट, सिरदर्द की दवाइयाँ, और कॉस्मेटिक्स। इन उत्पादों में महक इस पौधे से निकले तेल में होती है। लेमनग्रास की खेती साल के किसी भी समय में की जा सकती है।

जिरेनियम की खेती

जिरेनियम, एक खुशबूदार पौधा, से तेल निकाला जाता है जिसे औषधीय दवाओं, साबुन, इत्र, और सौंदर्य उत्पादों में उपयोग किया जाता है। पहले यह फसल विदेशों में ज्यादा उगाई जाती थी, लेकिन अब भारत में भी इसकी खेती की जा रही है, और यह फसल कम पानी वाली जगहों में भी उगाई जा सकती है।

मेंथा की खेती

मेंथा को किसानों के बीच मिंट नाम से भी जाना जाता है. दवाइयों के साथ-साथ इसके तेल का इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स, टूथपेस्ट और कैंडी भी बनाया जाता है. इस वक्त भारत मेंथा तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है.

खस की खेती

खस के प्रत्येक भाग जड़-पत्ती और फूल का उपयोग कर किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. इनका उपयोग महंगे इत्र, सुगंधीय पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधनों तथा दवाइयों को बनाने में होता है. फिलहाल देश में गुजरात, तामिलनाडु, कर्नाटक,बिहार और उत्तर प्रदेश में इसकी खेती बड़े पैमाने में हो रही हैं.

अश्वगंधा की खेती

अश्वगंधा को एक देशी औषधीय पौधा भी माना जाता है. इसका भारतीय चिकित्सा पद्धितियों में भी काफी उपयोग है. इसकी जड़ों का उपयोग आयुर्वेद और यूनानी दवाओं को बनाने में भी किया जाता है.

सुगंधित फसलों की ले सकते हैं ट्रेनिंग

सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध अनुसंधान संस्थान (CIMAP) की तरफ से किसानों को सुगंधित फसलों की खेती की ट्रेनिंग भी दी जाती है. आप इसके लिए सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध अनुसंधान संस्थान विजिट कर सकते हैं. साथ ही आप training@cimap.res.in पर मेल कर भी संस्थान से संपर्क कर सकते हैं.

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