गन्ने की उन्नत किस्में: अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधी, अधिक मोटाई और गिरने के प्रति सहनशील किस्म

गन्ने की उन्नत किस्में: अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधी, अधिक मोटाई और गिरने के प्रति सहनशील किस्म
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गन्ने की उन्नत किस्में: अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधी, अधिक मोटाई और गिरने के प्रति सहनशील किस्म

खेत खजाना : गन्ना भारत में एक महत्वपूर्ण फसल है, जो चीनी, गुड़, शराब और इथेनॉल जैसे उत्पादों का मुख्य स्रोत है। गन्ने की खेती करने वाले किसानों को अच्छी आमदनी और मुनाफा मिलता है। लेकिन गन्ने की खेती में कई चुनौतियां भी होती हैं, जैसे कि रोग, कीट, सूखा, बाढ़, जलवायु परिवर्तन और बाजार में उत्पाद की मांग और कीमत। इन सबका सामना करने के लिए, किसानों को गन्ने की उन्नत और उत्पादक किस्मों का चयन करना चाहिए, जो इन परिस्थितियों के अनुकूल हों और अधिक उपज दें।

गन्ने की उन्नत किस्में

गन्ने की उन्नत किस्में वे हैं, जो गन्ने की जातियों के बीच क्रॉस ब्रीडिंग या जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित की गई हों। इन किस्मों में गन्ने की विशेषताओं को सुधारा गया है, जैसे कि उपज, रिकवरी, रोग प्रतिरोध, सूखा सहनशीलता, गुणवत्ता, रंग, आकार और स्वाद। गन्ने की उन्नत किस्मों का उद्देश्य गन्ने की खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाना है।

भारत में गन्ने की उन्नत किस्मों का विकास और प्रचार अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (AICRP) के तहत किया जाता है। इस परियोजना में भारतीय गन्ना प्रजनन संस्थान (ICAR-SBI), कोयंबटूर, तमिलनाडु और गन्ना प्रजनन संस्थान अनुसंधान केंद्र (ICAR-SBI-RC), करनाल, हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यीय गन्ना अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल हैं।

इन संस्थानों ने गन्ने की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जो भारत के विभिन्न राज्यों में अनुसूचित और अनुशंसित की गई हैं। इनमें से कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं:

CO-0238 (करण-4): यह किस्म उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी है। इसकी उपज 32.5 टन प्रति एकड़ और रिकवरी 12 प्रतिशत से अधिक है। इसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनुसूचित किया गया है।

CO-14005 (अरुणिमा): यह किस्म उच्च उपज और सूखा सहनशील है। इसकी उपज 35.5 टन प्रति एकड़ और रिकवरी 11.5 प्रतिशत है। इसे तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अनुसूचित किया गया है।

CO-16030 (करण-16): यह किस्म उच्च उपज और लाल सड़न रोग प्रतिरोधी है। इसकी उपज 40.5 टन प्रति एकड़ और रिकवरी 11.8 प्रतिशत है। इसे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनुसूचित किया गया है।

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