Magahi Paan: आज ही शुरू करे मगही पान की खेती! सरकार दे रही है बंपर सब्सिडी, जल्द करें आवेदन

Magahi Paan: आज ही शुरू करे मगही पान की खेती!  सरकार दे रही है बंपर सब्सिडी, जल्द करें आवेदन
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पान की बात करते ही बनारसी पान का नाम सबसे पहले लोगों के दिमाग में आता है। लोगों की तो यही मान्यता होती है कि पूरे भारत में सिर्फ बनारसी पान ही प्रसिद्ध है, लेकिन यह बिल्कुल सच नहीं है। विभिन्न राज्यों में विभिन्न प्रकार के पान की खेती होती है। उत्तर प्रदेश में जहां बनारसी पान प्रसिद्ध है, वहीं बिहार में मगही पान लोगों के दिलों पर राज करता है। यहां लोग मगही पान को खाने में बहुत आनंद लेते हैं।

मगही पान की खेती गया, औरंगाबाद, नवादा और नालंदा जिलों में सबसे अधिक होती है। राज्य सरकार ने हाल ही में एक महत्त्वपूर्ण फैसला लिया है जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि मगही पान के क्षेत्रफल को बढ़ाया जाए। इससे मगही पान से जुड़े किसानों को बड़ा फायदा होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने विशेष उद्यानिकी फसल योजना में मगही पान को भी शामिल किया है। इस योजना के तहत मगही पान की खेती करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

मगही पान की खेती के लिए इकाई लागत 70500 रुपये निर्धारित की गई है

राज्य सरकार ने विशेष उद्यानिकी फसल योजना के अंतर्गत मगही पान की खेती के लिए 300 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रति इकाई लागत को 70,500 रुपये तय किया है। अर्थात, अगर कोई किसान 300 वर्गमीटर में मगही पान की खेती करता है, तो उसे 50% अनुदान के रूप में 70,500 रुपये मिलेंगे।

इससे उन्हें 50% अनुदान के तहत 35,250 रुपये मुफ्त में प्राप्त होंगे। यहां तक कि बिहार सरकार की योजना गया, औरंगाबाद, नवादा, और नालंदा जिलों के किसानों के लिए है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं।

गया जिले में 700 किसान पहले मगही पान की खेती करते थे

नवादा, औरंगाबाद, गया और नालंदा जिले में सबसे अधिक मगही पान की खेती होती है. अकेले गया जिले में 200 किसान इसकी खेती करते हैं. गुरारू गुरुआ, आमस और वजीरगंज प्रखंड में मगही पान की खेती करने वाले किसानों की संख्या सबसे अधिक है. हालांकि, गया जिले में मगही पान के रकबे में गिरावट आई है.

पहले यहां पर 25 से 30 एकड़ में किसान मगही पान की खेती करते थे, लेकिन अब इसका रकबा घटकर 15 एकड़ पर पहुंच गया है. इसी तरह पहले करीब 700 किसान मगही पान की खेती से जुड़े हुए थे, जिसकी संख्या घटकर अब 200 पर पहुंच गई है.

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