Opium Poppy Cultivation: इन तीन राज्यों में होगी अफीम पोस्त की खेती, ऐसे किसानों को मिलेगा लाइसेंस

Opium Poppy Cultivation: इन तीन राज्यों में होगी अफीम पोस्त की खेती, ऐसे किसानों को मिलेगा लाइसेंस
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Opium Poppy Cultivation: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए 2023-24 की फसल के लिए अफीम पोस्त की खेती (Opium Poppy Cultivation) के लाइसेंसिंग पॉलिसी का ऐलान किया है। इस नई पॉलिसी के तहत इन राज्यों में लगभग 1.12 लाख किसानों को लाइसेंस दिए जा सकते हैं, जो पिछले फसल वर्ष से 27,000 अतिरिक्त किसानों को शामिल करता है। यहाँ, सामान्य शर्तों के अनुसार यह ऐलान किया गया है।

यह वृद्धि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शारीरिक दर्द को कम करने, चिकित्सा देखभाल और अन्य चिकित्सा उद्देश्यों के लिए औषधीय तैयारियों की मांग को पूरा करने के उद्देश्य से हो रही है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि अल्केलॉइड उत्पादन घरेलू और भारतीय निर्यात उद्योग की जरूरतों को संतुष्ट कर सके।

फार्मास्युटिकल मांग को पूरा करना उद्देश्य

यह बढ़ोतरी फार्मास्यूटिकल तैयारियों की मांग को शारीरिक दर्द कम करने और अन्य चिकित्सा उद्देश्यों के लिए पूरा करने के लिए हुई है। इससे अल्केलॉइड उत्पादन की घरेलू और भारतीय निर्यात उद्योग की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकेगा।

इस नई एनुअल लाइसेंस पॉलिसी में मुख्य विशेषताओं में शामिल है कि पहले जैसे ही वर्तमान अफीम किसानों के लाइसेंस की वैधता को बरकरार रखा जाएगा, जिन्होंने मॉर्फिन (MQY-M) की औसत उपज 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक प्राप्त की है।

साथ ही, वर्तमान गोंद (Opium Gum) के किसानों के लिए भी एक नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिन्होंने 3.0 से 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मॉर्फीन सामग्री के साथ गोंद की खेती की है। इनके लिए अब केवल 5 साल की वैधता के साथ कंसेंट्रेटेड पॉपी (पोस्ट) स्ट्रॉ (खसखस या भूसा) (CPS) के लिए लाइसेंस प्राप्त किया जा सकेगा।

लाइसेंस शर्तों में और अधिक छूट

इसके अलावा, साल 2022-23 के सभी सीपीएस-आधारित किसान, जिन्होंने सरकार को अफीम की आपूर्ति की है, लेकिन किसी भी आदेश या निर्देश के तहत वंचित नहीं किया गया है, उनके लाइसेंस को भी इस साल सीपीएस-आधारित खेती के लिए बनाए रखा गया है. केंद्र सरकार ने इस नीति के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए सीपीएस पद्धति जारी करने को लेकर सामान्य लाइसेंस शर्तों में और अधिक छूट दी है.

साल 2020-21 से अनलांस्ड पोस्त के लिए लाइसेंस की व्यवस्था सामान्य तरीके से शुरू की गई थी और तब से इसका विस्तार किया गया है. वहीं, केंद्र सरकार ने अपने खुद के अल्केलॉइड कारखानों की क्षमता में बढ़ोतरी की है.

यह इन कारखानों में अच्छे प्रबंधन अभ्यासों को अपनाने के लिए आगे बढ़ रही है और भारत में अफीम प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने को लेकर पहले से ही अफीम गोंद के प्रोसेसिंग के साथ-साथ पॉपी स्ट्रॉ के प्रोसेसिंग के लिए निजी क्षेत्र के साथ जुड़ चुकी है.

सरकार का उद्देश्य अनलांस्ड पोस्त के लिए लाइसेंसिंग को और अधिक विस्तारित करने का है. केंद्र सरकार ने कंसेंट्रेटेड पॉपी स्ट्रॉ के लिए इसके लिए पीपीपी आधार पर 100 मीट्रिक टन क्षमता की एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया है. इससे भारत न केवल अपनी घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि अल्केलॉइड और अल्केलॉइड-आधारित उत्पादों का निर्यात भी कर सकेगा.

लाइसेंसधारी किसानों की संख्या बढ़कर 1.45 लाख

केंद्र सरकार देश में मांग और प्रोसेसिंग कैपेसिटी बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है. मांग और प्रोसेसिंग क्षमता में बढ़ोतरी के साथ यह आशा की जाती है कि आने वाले 3 वर्षों में अफीम पोस्त की खेती के लिए लाइसेंसधारी किसानों की संख्या बढ़कर 1.45 लाख हो जाएगी.

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