Papaya Farming: आज ही शुरू करें पपीता की खेती! सरकार दे रही 45 हजार रुपए का लाभ, ऐसे उठाए फायदा

Papaya Farming: आज ही शुरू करें पपीता की खेती! सरकार दे रही 45 हजार रुपए का लाभ, ऐसे उठाए फायदा
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किसानों के लिए पपीते की खेती बहुत ही फायदेमंद सिद्ध हो रही है। उन्हें बागवानी मिशन के तहत अनुदान भी मिल रहा है। किसानों के अनुसार, उत्पादित फल को बेचने में कोई समस्या नहीं हो रही है। जब फल अच्छी गुणवत्ता में होता है, तो व्यापारी स्वयं ही आकर उन्हें खरीद ले जा रहे हैं।

कैमूर के कुदरा प्रखंड के किसान रामेश्वर भारती ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ जमीन में पपीते की खेती की है, और उन्हें कृषि विभाग के बागवानी मिशन के तहत अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने रेड लेडी ताइवान प्रजाति के पपीते की खेती की है, जिन्हें बागवानी विभाग ने उपलब्ध कराया था।

खेत से खरीद ले जाते हैं व्यापारी

उन्होंने बताया कि पौधों से बहुत अच्छे फल मिल रहे हैं। अधिकांश फल पेड़ पर ही पक रहे हैं, जिससे उन्हें उन्हें बेचने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। व्यापारी स्वयं आकर पपीते के फलों को खरीद ले जा रहे हैं। रामेश्वर बताते हैं कि उनकी पपीते की खेती को देखकर अन्य किसान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान

उद्यान पदाधिकारी सूरज पांडेय बताते हैं कि जिले में मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत 5 हेक्टेयर में पपीता की खेती करने का लक्ष्य प्राप्त है। इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर की कुल लागत 60 हजार रुपये है, जिसमें से 75 प्रतिशत, यानी 45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर, का अनुदान दिया जा रहा है।

ऑनलाइन आवेदन करें

किसानों को अनुदान पर रेड लेडी प्रभेद का पौधा उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए किसानों को विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके लिए किसान के पास जमीन की रसीद, किसान पंजीयन संख्या और उसका फोटो अनिवार्य है।

पहले आओ पहले पाओ

आवेदन करनेवाले किसानों को पहले आओ पहले पाओ प्रक्रिया अपनाते हुए प्रति हेक्टेयर 2500 पौधे दिए जाते हैं। पौधे की कीमत विभाग द्वारा 20 रुपए निर्धारित की गई है, जिस पर साढ़े 13 रुपए सब्सिडी दी जाती है। पपीता के लिए प्रति हेक्टेयर मिलने वाला 45 हजार रुपये के अनुदान में पहले वर्ष में 75 प्रतिशत अर्थात 33750 रुपये दी जाती है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि दूसरे वर्ष दी जाती है।

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