पराली जलाने वाले हो जाए सावधान! सुप्रीम कोर्ट ने पॉल्यूशन रोकने के लिए दिया ये निर्देश, जानिए यहां

पराली जलाने वाले हो जाए सावधान! सुप्रीम कोर्ट ने पॉल्यूशन रोकने के लिए दिया ये निर्देश, जानिए यहां
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खरीफ फसलों की कटाई अब सभी राज्यों में अंग्रेजी के बाद चल रही है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनके कारण दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि फसल अवशेष जलाने की घटनाएं बंद होनी चाहिए। साथ ही, एक न्यायिक निगरानी व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिससे हर साल इस स्थिति का सामना ना किया पड़े।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को दिया निर्देश

खेतों में आग लगने की लगातार होती घटनाओं को देखते हुए न्यायिक संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों को प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हम कम से कम अगली सर्दियों को थोड़ा बेहतर बनाने का प्रयास करें।

पीठ ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव के अध्यक्षता में समिति ने कई बैठकों को संचालित किया। इन बैठकों में इस मुद्दे पर ध्यान दिया गया कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के लिए कैसे एक कार्य योजना तैयार की जाए। इन कार्य योजनाओं को अपनाने के लिए संबंधित राज्यों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अदालत को दो महीने के अंदर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

अदालत को भी करनी चाहिए निगरानी

कोर्ट ने कहा कि इस मामले की निरंतर निगरानी की आवश्यकता है. जब समस्या उत्पन्न होती है तभी हम अचानक इसे उठाते हैं. न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि अदालत को भी कुछ समय के लिए पराली जलाने वाली घटनाओं की निगरानी करनी चाहिए. इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 फरवरी रखी गई है.

'जुर्माना वसूलने की गति धीमी'

पंजाब सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि राज्य ने 6 दिसंबर को एक हलफनामा दायर किया है जिसमें फसल अवशेष जलाने के लिए जिम्मेदार लोगों से पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली के बारे में विवरण भी शामिल है. वकील ने 21 नवंबर को पिछली सुनवाई में अदालत को बताया था कि अपराधियों पर कुल 2 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. इस पर कोर्ट ने कहा कि वसूली राशि अभी भी लगाए गए जुर्माने का सिर्फ 53 प्रतिशत ही है.वसूली में तेजी लाई जानी चाहिए.

इस दावे पर कि 15 सितंबर से 30 नवंबर, 2023 के बीच खेतों में आग लगने की घटनाएं पहले की तुलना में कम हुई हैं, अदालत ने कहा, "मुद्दा यह है कि, अभी भी खेतों में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, इसे रोकने चाहिए. पीठ ने इस दौरान उत्तर प्रदेश में खुले में कचरा जलाने से संबंधित मामले पर भी अपनी बात रखी.

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