यमुना से यूपी, दिल्ली और हरियाणा के शहरों पर मंडरा रहा है खतरा, भारी नुकसान की आशंका

यमुना नदी घाटी में जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा या बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाया है।

यमुना से यूपी, दिल्ली और हरियाणा के शहरों पर मंडरा रहा है खतरा, भारी नुकसान की आशंका
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यमुना नदी घाटी में जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा या बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाया है। इससे दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी जैसे राज्यों के लोगों को पानी की कमी और बिजली की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

यमुना नदी गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। इसका उद्गम उत्तराखंड के यमुनोत्री से होता है और यह दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार के कई शहरों से गुजरती है। यमुना नदी घाटी का क्षेत्रफल 3,65,000 वर्ग किलोमीटर है और इसमें 70 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। यमुना नदी घाटी का जल सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन, पर्यटन, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2005 से 2020 तक के यमुना नदी के प्रवाह और वर्षा के आंकड़े एकत्रित करके एआई के जरिए विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया है कि यमुना नदी घाटी में वर्षा के पैटर्न में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। वर्षा की मात्रा और तारीख में अनियमितता बढ़ी है। इससे यमुना नदी का प्रवाह भी अस्थिर हो गया है। वैज्ञानिकों ने यह भी अनुमान लगाया है कि आने वाले दशक में यमुना नदी घाटी में या तो बहुत सूखा होगा या बहुत बाढ़ आएगी।

जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में भी भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन, बर्फानी झीलों का फटना जैसी आपदाओं की संभावना बढ़ गई है। इससे जनजीवन और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह शोध चीन की शोध पत्रिका ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन जियो साइंसेज’ में प्रकाशित हुआ है।

यमुना नदी घाटी में जलवायु परिवर्तन का एक और प्रभाव बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। यमुना नदी घाटी में कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं, जो पानी की उपलब्धता और प्रवाह पर निर्भर हैं। अगर वर्षा की कमी होती है, तो जल संग्रहण क्षमता और टरबाइन की कार्यक्षमता कम हो जाएगी। अगर बारिश अधिक होती है, तो गाद और मलबे के कारण टरबाइन को नुकसान हो सकता है। इससे बिजली उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

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