यूपीएससी में असफलता के बाद भी नहीं हारीं, आईएएस स्मिता सभरवाल की सफलता की कहानी

यूपीएससी की परीक्षा में सफल होना किसी भी परीक्षार्थी का सपना होता है। लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए कई बार कई बार असफलता का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग इन असफलताओं से हिम्मत हार देते हैं, तो कुछ लोग इन्हें एक चुनौती मानकर दोबारा प्रयास करते हैं।

यूपीएससी में असफलता के बाद भी नहीं हारीं, आईएएस स्मिता सभरवाल की सफलता की कहानी
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ऐसे ही एक प्रयासशील परीक्षार्थी थीं आईएएस स्मिता सभरवाल, जिन्होंने यूपीएससी के पहले प्रयास में असफल होने के बाद भी नहीं हारी और दूसरे प्रयास में चौथी रैंक हासिल कर देश की सबसे बड़ी सिविल सेवा में अपना स्थान बनाया। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि स्मिता सभरवाल ने अपनी सफलता के लिए कैसी रणनीति बनाई और कैसे वे सोशल मीडिया पर एक लोकप्रिय आईएएस अधिकारी बनीं।

यूपीएससी की परीक्षा में सफलता के लिए स्मिता सभरवाल की रणनीति

स्मिता सभरवाल का जन्म दार्जिलिंग में हुआ था, लेकिन उनका परिवार हैदराबाद में रहता था। उनके पिता एक सेना के अधिकारी थे, इसलिए उन्हें अपने बचपन में कई जगहों पर शिफ्ट होना पड़ा। स्मिता ने अपनी स्कूली शिक्षा हैदराबाद के सेंट एंस से की और कक्षा 12वीं में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन सेंट फ्रांसिस डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन से बीकॉम में की।

स्मिता ने अपनी पढ़ाई के दौरान ही यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही प्रीलिम्स को क्वालीफाई कर लिया, लेकिन मेन्स में उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने इस असफलता को एक सीख मानकर अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास किया और दूसरे प्रयास में फिर से प्रीलिम्स और मेन्स दोनों को पास कर लिया। लेकिन इस बार इंटरव्यू में उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने तीसरे प्रयास में भी वही दुहराया और इंटरव्यू में फिर से असफल रहीं।

स्मिता ने अपने चौथे प्रयास में एक बड़ा फैसला लिया और अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट बदल दिया। उन्होंने पहले जियोग्राफी को अपना ऑप्शनल बनाया था, लेकिन उन्हें लगा कि वे इसमें अच्छे अंक नहीं ला पा रही हैं। इसलिए उन्होंने अपना ऑप्शनल पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बदल दिया। इस बदलाव ने उनके लिए काम किया और उन्होंने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में चौथी रैंक हासिल कर ली। इसके साथ ही उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया और आईएएस अधिकारी बन गईं।

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