चने की फसल में अधिक पैदावार के लिए दिसंबर महीने की आखिर में करें यह जरूरी काम, चने में लगने वाले रोगों पर भी होगा नियंत्रण

देरी से बोई गई फसल में शाखाओं या फली बनते समय यूरिया/डीएपी के घोल का छिड़काव करें।

चने की फसल में अधिक पैदावार के लिए दिसंबर महीने की आखिर में करें यह जरूरी काम, चने में लगने वाले रोगों पर भी होगा नियंत्रण
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चने की फसल में अधिक पैदावार के लिए दिसंबर महीने की आखिर में करें यह जरूरी काम, चने में लगने वाले रोगों पर भी होगा नियंत्रण

रबी सीजन में चने की बुआई का समय दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक का है। यहां देखें कैसे किसान चने की खेती में खरपतवार, सिंचाई, और उर्वरक के सही उपयोग से अधिक से अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं

1. खरपतवार का नियंत्रण

बुआई के 30 दिनों बाद खरपतवारों की निराई-गुड़ाई करें।

इससे जड़ों की बढ़वार और पैदावार में वृद्धि होगी।

बुआई के 35-40 दिनों बाद शीर्ष कालिका की तुड़ाई करें।

2. सिंचाई का सही समय

उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में फूल बनते समय सिंचाई करें।

उत्तर-पश्चिमी मैदानी तथा मध्य भारत क्षेत्रों में दो सिंचाइयाँ जैसे शाखाएँ निकलते समय सिंचाई करें।

3. कीट-रोग प्रबंधन

फली की तुड़ाई के समय खरपतवारों के साथ-साथ कीट-रोग का प्रबंधन करें।

स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करके कीटों को नियंत्रित करें।

जैविक उपचार के रूप में ट्राईकोडर्मा विरडी या स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस का उपयोग करें।

4. उर्वरक का सही प्रबंधन

बुआई से पहले कुंडों में उर्वरक का पूरी मात्रा में प्रयोग करें।

देरी से बोई गई फसल में शाखाओं या फली बनते समय यूरिया/डीएपी के घोल का छिड़काव करें।

5. खाद का उपयोग

बुआई से पहले 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश, और 20 किलोग्राम सल्फर का उपयोग करें।

जिंक सल्फेट की अगर कमी हो, तो 20 किलोग्राम/हेक्टेयर का प्रयोग करें। इन सुझावों का पालन करके, किसान अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं


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