यहां होती है सोना-मोती व नीले गेहूं की खेती! बंपर पैदावार से किसानों की होती है तगड़ी कमाई

यहां होती है सोना-मोती व नीले गेहूं की खेती! बंपर पैदावार से किसानों की होती है तगड़ी कमाई
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सोना-मोती गेहूं प्राचीन काल से उपयोग में था। इस गेहूं में अन्य अनाजों की तुलना में तीन गुना अधिक फोलिक एसिड पाया जाता है। यह अनाज, जिसके गोल-गोल दाने होते हैं, अब लगभग समाप्त हो चुका है। लोग अब इसके फायदों को समझकर अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रख रहे हैं, और कई किसान इसकी खेती कर रहे हैं। गया जिले में पिछले 3 साल से सोना-मोती गेहूं की खेती हो रही है। रहने वाले किसान आशीष कुमार सिंह ने इस बार तीन बीघा में सोना-मोती गेहूं, और लगभग दो बीघा में नीली गेहूं की खेती की है।

पिछले साल, आशीष कुमार सिंह ने दो बीघा में सोना-मोती गेहूं की खेती की थी, जिससे लगभग 16 क्विंटल गेहूं पैदा हुआ था। उन्होंने बीज का संरक्षण किया और किसानों को इसकी खेती करवाने के लिए बीज उपलब्ध कराया। बीज की कीमत प्रति किलो लगभग 80-100 रुपये थी। वे नीले गेहूं की भी खेती करते हैं। इस बार, वे दो बीघा में नीला गेहूं उगा रहे हैं। आशीष कुमार सिंह विभिन्न प्रकार की खेती करते हैं, जैसे काला आलू, काला गेहूं, काला धान, नीला गेहूं, काली हल्दी, आदि।

जीरो टिलेज के माध्यम से खेतों में गेहूं करते हैं बुवाई

आशीष ने जीरो टिलेज का उपयोग करके गेहूं की बुवाई करवाई है। इस तकनीक से खेती करने में जुताई करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे समय और पैसे की बचत होती है। सोना-मोती गेहूं, जो पंजाब में पुरानी किस्म के रूप में उगाई जाती है, वह बिहार में लोकप्रिय हो रही है। गया के अलावा, बेगूसराय, अरवल, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और अन्य कई जिलों में भी इसकी खेती हो रही है।

खनिज-प्रोटीन की अधिक मात्रा पाई जाती अधिक

गया कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक बताते हैं कि सोना-मोती गेहूं में किसी अन्य अनाज के मुकाबले तीन गुना अधिक फोलिक एसिड होता है. यही नहीं इसमें खनिज और प्रोटीन की अधिक मात्रा पाई जाती है. फोलिक एसिड गर्भवती महिलाओं के लिए काफी लाभदायक है. साथ ही बालों को भी मजबूत बनाता है.

इस गेहूं की पैदावार प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल होती है, जबकि अन्य किस्म की पैदावार गेहूं प्रति एकड़ 12 से 16 क्विटल है. इस किस्म में ग्लूटेन और ग्लाइसीमिक तत्व कम होने के कारण, डायबिटीज पीड़ितों में इसकी बहुत मांग है.

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